कई दृष्टिकोण से जैविक खेती किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है

बरमकेला/सुवर्ण कुमार भोई/छत्तीसगढ़ कृषि वैज्ञानिकों और किसान विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक कृषि और जैविक खेती किसान के विकास का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।मानव जाति ने जब अन्न का उत्पादन शुरू किया होगा तो जाहिर है उसने उन साधनों का ही उपयोग किया होगा जो उसके पास उपलब्ध होंगे या वो साधन खुद निर्मित किए होंगे | लेकिन मानव जाति ने जो भी साधन निर्मित किया होगा या किसी साधन का उपयोग ही क्यूं ना किया हो उन सभी का निर्माण प्रकृति या वातावरण को ध्यान में रखकर ही किया होगा |


जब मनुष्य ने अन्नोत्पादन करना शुरू किया होगा तो चुनौतियां भी बहुत रही होंगी लेकिन जैसे जैसे समय बढ़ता गया हम यानि मानव जाति ने कृषि से संबंधित उपकरण निर्मित किए, शोध किए, अलग अलग खोज होते गए और आज कृषि जब आधुनिक दौर में प्रवेश कर चुकी है तो आज किसी भी तरीके के उपकरण और संसाधनों की कमी नहीं है


आज के आधुनिक दौर में जब किसी तरीके के साधन कमी ना होने के बावजूद चुनौतियां कम नहीं हैं | आज के समय की सबसे बड़ी चुनौती है शुद्ध अनाज यानि रसायनयुक्त अनाज जो बिना किसी केमिकल के उपयोग के तैयार की गई खेती हो | आज के दौर की सबसे बड़ी चुनौती बन के उभरी है रसायनयुक्त खेती को रसायन मुक्त करना |


लेकिन बहुत लोगों के मन में प्रश्न यह आएगा कि ये रासायनिक खेती होती इसका विकल्प क्या है?


इसका विकल्प वो है जो सदियों से चलता आ रहा है यानि प्राकृतिक खेती जिसे आज जैविक खेती(आर्गेनिक फार्मिंग) कहते हैं, जिसमें रासायनिक खाद का उपयोग नहीं होता है |


तो जब आज की पीढ़ी या आगामी पीढ़ी पूछेगी कि ये जैविक खेती और रासायनिक खेती में अंतर क्या होता है और ये रासायनिक खेती इतनी ही हानिकारक थी तो इसे बंद क्यूं नहीं कर दिया तो ये अंतर इसमें हम अपने आज और आने वाले कल की पीढ़ी के अवगत रहे उसके लिए ये अंतर जानने जा रहे हैं….


जैविक खेती और रासायनिक खेती में अंतर

पहले जानते हैं जैविक खेती के बारे में



जैविक खेती प्राकृतिक संसाधनों के माध्यम से होने वाली खेती है जिसमें जैविक खाद यानि का गाय या भैंस के गोबर और वनस्पतियों के मिश्रण से बनी खाद का उपयोग किया जाता है |
जैविक खेती सस्ती सरल व किसान के अपने संसाधनों पर निर्भर होती है यानि किसान की बाकी फर्टिलाइजर के अपेक्षागत लागत कम ही आती है |
जैविक खेती से पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होता है, पर्यावरण एकदम दुरुस्त होता है किसी भी तरह प्रदूषण नहीं पैदा होता यानि इसके सभी अवयव प्रकृति में शामिल हो जाते हैं जिससे प्रकृति दूषित नहीं होती है |
जैविक खेती करने से मनुष्य ही नहीं बाकी सभी पशु पक्षी, जीव जंतु भी सुरक्षित रहते हैं | नदी, नाला, झील, तालाब भी सुरक्षित रहते हैं यानि इनका पानी स्वच्छ और शुद्ध रहता है | इन सबके बीच संतुलन बना रहता है |
जैविक खाद का प्रयोग करने से बीमारियां कम ही लगती हैं और यदि कोई बीमारी हो भी जाए तो उसे लड़ने की रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होती है इससे किसान स्वस्थ और अधिक खेती करने के लिए तत्पर रहता है |
इसमें किसान द्वारा प्रयोग किए जाने वाले प्राकृतिक खाद से रोग कम लगते हैं जिससे किसानों की लागत में भी फर्क होता है अपेक्षाकृत कम ही आती है |
प्राकृतिक कूड़े कचरे व खरपतवार का उचित उपयोग करने से स्वच्छता को बढ़ावा मिलता है |
जैविक खेती करने से फसलों को सिंचाई की कम आवश्यकता होती है | यानि पानी को बचत होती है, पानी भी शुद्ध रहता है |

जानते हैं रासायनिक खेती के बारे में



रासायनिक खेती अप्राकृतिक खाद यानि मानव द्वारा रसायनों (केमिकल्स) से निर्मित खाद से होती है | इस खाद में अलग अलग प्रकार के केमिकल्स होते हैं जो तय समय तक फसलों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने में सहायक होते है
रासायनिक खेती, प्राकृतिक खेती के अपेक्षा मंहगी होती है और इसकी खाद बाजार में ही मिलती है यानि किसान इस तरीके से बाजार के ही अधीन हो जाते हैं |
रासायनिक खेती से पर्यावरण को काफी नुकसान होता है | यह पर्यावरण के प्रतिकूल होती है, पर्यावरण दूषित होता है |
रासायनिक खेती से संपूर्ण जैव विविधता, मनुष्य, पशु पक्षी, कीड़े मकोड़े, भूमि, जल वायु, आकाश यानि प्रकृति के पांचों तत्वों सहित अन्य सूक्ष्म जीवाणुओं में संतुलन बिगड़ जाता है |
रासायनिक खाद का प्रयोग करने से बीमारियां बढ़ती हैं जिससे किसानों की लागत बढ़ जाती है, फसलों में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशक बहुत मंहगे होते हैं और इसके इस्तेमाल से सूक्ष्म जीवाणु को प्रकृति के सहायक होते है वे समाप्त हो जाते हैं और किसानों को भी कई तरह को बीमारियां हो जाती हैं |
कूड़े कचरे, खरपतवारों का उचित उपयोग ना होने के कारण गंदगी बढ़ती है और इसके कारण अनेक रोग व बीमारियां बढ़ती हैं |
रासायनिक खेती में सिंचाई के पानी की भी अधिक आवश्यकता होती है, इससे भी खेती की लागत बढ़ जाती है जिससे जलस्तर भी गिरता चला जाता है और खेती में पानी की समस्या बनी रहती है |

जैविक खेती और रासायनिक खेती में सूक्ष्म रूप हमने अंतर तो जान लिया | अब यह किसान के ऊपर निर्भर करता है की उन्हें क्या करना है |

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