मोदी सरकार में साथ के लिए सहयोगियों की मांग

दिल्ली/इस बार नई सरकार की सूरत बदली-बदली नजर आने की संभावना है, क्योंकि भाजपा को अपनी बदौलत बहुमत नहीं मिला है और उसे अपने सहयोगियों पर निर्भर रहना पड़ेगा। सहयोगियों ने इस बार बीजेपी के सामने अपनी अपनी मांग रख दी है,जिसमें जेडीयू और टीडीपी ने सबसे ज्यादा मंत्री पद की मांग की है।

चिराग पासवान को 1 कैबिनेट पद का आश्वासन:- चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को एक केंद्रीय कैबिनेट पद का आश्वासन दिया गया है. ऐसा बताया जा रहा है की चिराग एक अतिरिक्त राज्य मंत्री पद की भी मांग कर रहे हैं।

नीतीश ने कैबिनेट स्तर के कम से कम 4 मंत्री पदों की रखी मांग:- जदयू के बड़े नेताओं के मुताबिक, इस बार जेडीयू अधिक मोलभाव की ताकत रखता है इसलिए बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को समर्थन देने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कैबिनेट स्तर के कम से कम चार  मंत्री पद, बिहार में जल्द विधानसभा चुनाव और राज्य के लिए विशेष राज्य का दर्जा चाहते हैं

विशेष राज्य के दर्जे की मांग सबसे ऊपर:- सूत्रों के मुताबिक, अपने ऊपर एंटी इनकंबेंसी को दूर करने के लिए बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग नीतीश की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है। जाहिर है कि नीतीश आगामी विधानसभा चुनाव में बिहार जैसे गरीब राज्य के लोगों को विशेष दर्जा दिलाकर एक खास तोहफा देना चाहते हैं। इतना ही नहीं, नीतीश गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले 94 लाख लोगों को दो लाख रुपये देने का वादा भी पूरा करना चाहते हैं। इसलिए विशेष प्रावधान के तहत विशेष दर्जा की मांग नीतीश कुमार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है।

सूत्रों की मानें तो  नीतीश कुमार के इस ‘मजबूत’ समर्थन के लिए भाजपा को ‘बड़ी’ कीमत चुकानी पड़ेगी. 2019 के विपरीत, जब JDU ने 16 सीटें जीती थीं, तब उसे एक मंत्री पद की पेशकश की गई थी, क्योंकि भाजपा अपने दम पर बहुमत में थी. इस बार JDU को 12 सीटें मिली हैं, लेकिन ये 2019 में मिली 16 सीटों से अधिक कीमती हैं.

नायडू ने 6 मंत्रालय और स्पीकर पद मांगा:- वहीं सूत्रों के मुताबिक, टीडीपी ने 6 मंत्रालयों समेत स्पीकर पद की मांग की।

शिवसेना,आरएलडी ने भी रखी अपनी मांग:- ऐसा बताया जा रहा है कि मीटिंग में हम सुप्रीमों मांझी ने एक, तो शिवसेना शिंदे गुट ने 2 ( एक कैबिनेट, एक स्वतंत्र प्रभार) मंत्रालयों की मांग की है।
वहीं, आरएलडी के जयंत चौधरी ने चुनाव से पहले किया वादा याद दिलाते हुए एक मंत्री पद मांगा है तो अपना दल की अनुप्रिया पटेल भी एक मंत्री पद की मांग की है।

ऐसा कहा जा रहा है कि यह कदम भविष्य में गठबंधन में किसी भी संभावित फूट से ‘बचाने’ के लिए है. मालूम हो कि दलबदल विरोधी कानून में लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि अंतिम निर्णय का समय और प्रकृति पूरी तरह उनके फैसले पर निर्भर होती है।

सूत्रों ने यह भी बताया कि तेदेपा प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू और जदयू प्रमुख व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस बारे में भाजपा के कुछ अन्य सहयोगियों से बातचीत की है.

इस बैठक में जेडीयू नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू, आजसू प्रमुख सुदेश महतो, RLD के जयंत चौधरी, जन सेना पार्टी के प्रमुख पवन कल्याण, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, एलजेपी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान, अपना दल (सोनेलाल) की नेता अनुप्रिया पटेल और हम के नेता जीतनराम मांझी के साथ ही बीजेपी की ओर से राजनाथ सिंह, अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और प्रधानमंत्री मौजूद थे।

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