एक पेड़ मां के नाम लगाकर लाखों पेड़ों की आहुति: डॉ.गुलशन खम्हारी

रायगढ़/देश के यशस्वी प्रधानमंत्री मान.नरेंद्र मोदी जी के जन्म दिवस पर “एक पेड़ मॉं के नाम” कैंपेन चलाया जा रहा । यदि इस उक्ति को समझा जाए तो -एक पेड़ मॉं को समर्पित किया जा रहा, किंतु गगनचुंबी वादों से धरातल में देखें तो जमीनी हकीकत इसके पूर्ण विपरीत है । जो जननेता जनता के बीच जल-जंगल-जमीन को लेकर लुभावने वादे करते रहे हैं ,दरअसल ये हिंदी फिल्मों के विलन अमरीश पुरी और शक्ति कपूर लगते हैं । जो अपनी मातृभूमि की दलाली में लिप्त लगते हैं क्योंकि यहां के जनजीवन को बचाने जिन्हें आगे आना चाहिए जनसुनवाई के खिलाफ एक भी नेता वैसे आगे नहीं आ रहे हैं । प्रजा बिना राजा कैसा?? लगता है इस राजतंत्र ने विदोहन का मन बना लिया है । एक ओर फोटो खिंचवाया जा रहा एक पेड़ मां के नाम,हैश टैग के साथ फिर लाखों करोड़ों पेड़ जो इस भू खुदाई में स्वाहा होने को उतारू हैं उनका क्या?? क्या उस समय करोड़ों वनस्पतियों के हत्या की जिम्मेदारी भी ले सकेंगे?
बहरहाल मुड़ागांव में कोयला खदान के लिए अडानी द्वारा बड़ी मात्रा में काटे गये जंगल को लेकर हुए भारी विरोध के बाद अब जेपीएल के नये कोल ब्लॉक की जनसुनवाई की तारीख घोषित हो गयी है। आगामी 14 अक्टूबर को जिंदल पॉवर लिमिटेड के गारे-पेलमा सेक्टर-1 कोल ब्लॉक के लिए धौंराभाठा में जनसुनवाई निश्चित की गयी है। इस जनसुनवाई को लेकर क्षेत्रवासियों में विरोध की चिंगारी फिर सुलगने लगी है। उल्लेखनीय है कि जेपीएल के इस कोयला खदान में सालाना उत्पादन 15 मिलियन होगा। अंडरग्राउंड और ओपन कास्ट दोनों खदान खोले जायेंगे। इस कोल ब्लॉक के लिए 3020 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जाने वाली है, जिसमें लगभग 120 हेक्टेयर भूमि वन भूमि है। जेपीएल के इस कोल ब्लॉक से धौंरा भाठा, टांगरघाट, समकेरा, झरना, बुडिय़ा, रायपारा, बागबाड़ी, तिलाईपारा, आमगांव, महलोई, बिजना, झिंकाबहाल, लिबरा और खुरुसलेंगा गाँव प्रभावित होंगे।
बता दें कि 27 अगस्त को तहसीलदार तमनार ने इस कोल ब्लॉक के लिए संबंधित ग्राम पंचायतों में 15 दिनों के अंदर ग्राम सभा आयोजित करने का आदेश दिया था। प्रभावित गांवों के निवासियों ने जिंदल को आवंटित कोल ब्लॉक के प्रस्ताव पर गंभीर चिंता जताई है। एसडीएम को दिए पत्र में उन्होंने एनओसी देने से पहले भूमि अधिग्रहण, मुआवजा, रोजगार और पर्यावरणीय प्रभावों पर विस्तृत जानकारी की मांग की है। इतना ही नहीं, प्रभावित क्षेत्र की सीमाओं का भी विस्तृत विवरण माँगा है और स्पष्ट जवाब मिलने तक ग्राम सभा आयोजित करने से इंकार भी किया है, क्योंकि बिना पर्याप्त जानकारी के प्रक्रिया को जल्दबाजी में पूरा करने से स्थानीय निवासियों को ही मुश्किल होगी। खनन से जुड़े जोखिमों की जानकारी, मुआवजे की दरों और प्रक्रिया, विस्थापितों के लिए वर्तमान पुनर्वास नीति की जानकारी, प्रमाणित किसानों और उनके परिवारों के साथ भूमिहीन परिवारों के लिए रोजगार के अवसर, महिलाओं के लिए सुविधाएं, अधिग्रहण का तरीका, मुआवजा राशि का भुगतान सरकार द्वारा किया जाएगा या कंपनी द्वारा, पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के उपायों आदि की जानकारी मांगी गई है ,अब आगे-आगे देखिए होता है क्या?



