स्वामी आत्मानंद विद्यालय डोंगरीपाली में संस्कृत सप्ताह का समापन हुआ

डोंगरीपाली/बरमकेला/छ.ग. संस्कृत विद्यामंडल रायपुर से प्राप्त निर्देशों के अनुरूप प्रदेश भर के समस्त विद्यालय एवं महाविद्यालय स्तर पर दिनांक 27 अगस्त से 02 सितम्बर 2023 तक विभिन्न गतिविधियों एवं कार्यक्रमों के माध्यम संस्कृत भाषा के संवर्धन एवं उन्नति के लिए स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिन्दी माध्यम विद्यालय डोंगरीपाली में संस्कृत सप्ताह मनाया गया।

विदित हो कि संस्कृत भाषा भारत देश की सबसे प्राचीन भाषा है. इसी से देश में दूसरी भाषाएँ निकली है. सबसे पहले भारत में संस्कृत ही बोली गई थी. आज इसे भारत के 22 अनुसूचित भाषाओं में से एक के रूप में सूचीबद्ध किया गया है भारत देश के प्राचीन ग्रन्थ वेद आदि की रचना संस्कृत में ही हुई थी. यह भाषा बहुत सी भाषा की जननी है. इसके बहुत से शब्दों के द्वारा अंग्रेजी के शब्द बने है महाभारत काल में वैदिक संस्कृत का प्रयोग होता है. संस्कृत आज देश की कम बोले जानी वाली भाषा बन गई है लेकिन इस भाषा की महत्ता को हम सब जानते है इसके द्वारा ही हमें दूसरी भाषा सीखने बोलने में मदद मिली. इसकी सहायता से बाकि भाषा की व्याकरण समझ में आई.

भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के आदेश से वर्ष 1969 में केन्द्रीय एवं राज्य स्तर पर संस्कृत दिवस मनाने का निर्देश जारी किया गया था। तभी से श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन पूरे भारत में संस्कृत दिवस मनाया जाता है। इसके लिए श्रावण पूर्णिमा के दिन को चुनने का कारण यह है कि हमारे प्राचीन भारत में इस दिन से ही शिक्षण सत्र और वेद पाठ शुरू हुआ था और छात्र भी इसी दिन से शास्त्रों का अध्ययन करने लगे थे। संस्कृत दिवस और संस्कृत सप्ताह मनाने का मूल उद्देश्य संस्कृत भाषा का प्रचार-प्रसार करना है

स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिन्दी माध्यम विद्यालय डोंगरीपाली में संस्कृत सप्ताह के प्रथम दिवस से लेकर सप्तम् दिवस तक को प्रत्येक दिवस दोपहर 3 बजे से 4 बजे तक शाला में अध्ययनरत कक्षा नवमी एवं दसवीं के विद्यार्थियों को लेकर विभिन्न गतिविधियों एवं कार्यक्रमों के माध्यम से आयोजन किया गया। जिसमें प्रथम दिवस का शुभारंभ दीपप्रज्वल सरस्वती वंदना एवं माननीय मुख्यमंत्री के संदेश वाचन के साथ किया गया। वहीं कार्यक्रम के संचालक डोतामणी मालाकार के द्वारा संस्कृत भाषा के महत्व तथा वर्तमान स्थिति के बारे में प्रकाश डाला गया। साथ संस्कृत गीत कालिदासो जने जने की प्रस्तुति से छात्रों को मुग्ध कर संस्कृत भाषा से जोड़ने का प्रयास किया गया। वहीं गतिविधि भवतः नाम किम् ? भवत्याः नाम किम् ? से छात्रों में संस्कृत बोलने में झिझक को दूर किया गया एवं बालरूचि के अनुरूप कार्टून फिल्म श्रेष्टः निधि का प्रदर्शन किया गया।
इस तरह द्वितीय से लेकर षष्ठम् दिवस तक प्रत्येक दिवस की शुरुवात दीपप्रज्वल एवं सरस्वती वंदना से किया जाता रहा। वहीं संस्कृत भाषा के संवर्धन के लिए संस्कृत गतिविधि मम परिचय वार्तालाप गीत सुरस सुबोधा राष्ट्र भक्तिम् करणीयम् पुरपुरः प्रयच्छ रे का सस्वर वाचन एवं संस्कृत भाषा के अनेको फिल्म- चतुरः श्रृंगालः आम्त द्राक्षाफलम् चत्वारि मित्राणि, भोजनम् हस्तप्रक्षालनम् के माध्यम संस्कृत के प्रति रूचि जागृत करते हुए संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसार हेतु विद्यार्थियों को तैयार किया गया। वहीं सप्ताह के अंतिम एवं सप्तम दिवस 2 सितम्बर को शाता के संपूर्ण विद्यार्थियों के समक्ष छ दिन तक चल रहे सभी गतिविधियों का प्रदर्शन करते हुए नीतिगलोक प्रतियोगिता एवं भाषा के महत्व पर भाषण तथा पर्यावरण रक्षण विषय पर वार्तालाप के माध्यम से संस्कृत भाषा के उन्नति के लिए तत्परता हेतु अपील किया गया।

संस्कृत सप्ताह के सफल आयोजन संस्था के प्रभारी प्राचार्य उग्रसेन चौधरी के मार्गदर्शन एवं व्याख्याता जसवंत सिंह, सोनसाय भगत,अमृततात बरिहा, मुकेश कुमार नायक श्रीमती हेमलता मालाकार राजीव कुमार पटेल, अनिता लकड़ा, लखन कुमार पटेल शिक्षक संजय कुमार भोय शशि प्रभा पटेल एवं श्रीमती साधना सिंह के विशेष सहयोग से सम्पन्न हुआ एवं पूरे कार्यक्रम का संचालन हिन्दी के व्याख्याता डोलामणी मालाकार द्वारा किया गया।



