नफरत की आग कब बुझेगी? अब ‘कारपोरेट जिहाद

हाल में महाराष्ट्र का नासिक शहर दो बार अखबारों की सुर्खियों में रहा। पहली बार अशोक खरात के मामले को लेकर, जो एक ढोंगी बाबा था और महिलाओं, खासकर समाज के उच्च वर्ग की महिलाओं, का यौन शोषण करता था। उसने अपनी छवि एक चमत्कारी बाबा की बनाने के लिए कुछ नए तरीके अपनाए। वह लोगों को उनका अतीत, वर्तमान और भविष्य बताकर प्रभावित करता था। वह महिलाओं को ब्रेन वाश कर उन्हें अपना अनुयायी बनाता था और उन्हें अपना सब कुछ उसे समर्पित कर देने के लिए राजी कर अपनी शारीरिक भूख मिटाता था। उसने सांप और अन्य जंगली जानवर पाले हुए थे और वह इन जानवरों से महिलाओं को डराकर कर उन्हें अपनी बात मानने के लिए मजबूर करता था। अंधश्रद्धा के इसी क्रम में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई, धीरेन्द्र शास्त्री, जिन्हें बागेश्वर धाम बाबा के नाम से जाना जाता है, से मिलने गए। यहां यह बताना प्रासंगिक होगा कि गवई यह दावा करते हैं कि वे डॉ. बी. आर. अम्बेडकर के अनुयायी हैं। अम्बेडकर केवल और केवल तार्किकता में विश्वास रखते थे। इस मामले को मीडिया ने थोड़ा-बहुत कव्हर किया और बजरंग दल और उसके जैसे अन्य संगठन चुप्पी साधे रहे क्योंकि यह एक हिन्दू बाबा द्वारा हिन्दू महिलाओं के दैहिक शोषण का मामला था मगर चूंकि इसमें कोई
इसके कुछ ही दिनों बाद नफरती तत्वों को इसी नासिक से नफरत की आग भड़काने के लिए पुलिस की एक रिपोर्ट के रूप में भरपूर ईधन मिल गया। इस रपट में एक हिंदू लड़की ने दावा किया था कि एक मुस्लिम कर्मचारी उसका यौन शोषण कर रहा है। इस मुस्लिम कर्मचारी का इस लड़की से अफेयर चल रहा था और लड़की के मुताबिक उस मुस्लिम युवक ने उससे शादी करने का वादा किया था, किंतु बाद में वह मुकर गया। पुलिस को की गई इस शिकायत से पुलिस और हिन्दुत्ववादी तत्वों को सक्रिय होने का अवसर मिल गया और पुलिस की एक गोपनीय कार्यवाही शुरू हुई। पुलिस की जांच, जिसकी सराहना राज्य के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस तक ने की, के अनुसार टाटा कन्सलटेंसी सर्विसिस (टीसीएस) में धर्मपरिवर्तन कराने की एक योजनाबद्ध साजिश को अमल में लाया जा रहा था। कुछ मुस्लिम कर्मचारी (जिनकी संख्या सात थी) हिंदू कर्मचारियों को लालच देकर और डरा धमका कर उनसे नमाज पढ़वाने और उन्हें गौमांस खिलाने का अभियान चला रहे थे। इस मामले से जुड़ी खबरें मीडिया में छाई हुई हैं। और एक नया शब्द ‘कारपोरेट जिहाद गढ़ लिया गया है। इससे आशय यह है कि बड़ी कंपनियों में मुस्लिम कर्मचारी लव जिहाद और धर्मपरिवर्तन में जुटे हुए हैं।



