बरमकेला अंचल के प्राचीन एवम् पौराणिक शिव मंदिरों में भक्तों ने किया पूजा अर्चना


डोंगरपाली/बरमकेला/साल के अंतिम श्रावण सोमवार मे कोठीखोल के बनहर शिव मंदिर जो आस्था का केंद्र है पुजारी सुधीर दास के अनुसार यहां 4.30 बजे से भक्तों का आना शुरू हो जाता है जहा पूजा पाठ करके भक्त श्रद्धालु अपने आपको धन्य मानते हैं।

बरमकेला अंचल के विभिन्न प्राचीन और पौराणिक शिव मंदिर जैसे पुजेरीपाली, सहाजपाली,कलमी, लेंधरा, पोरत, रिसोरा,दुलोपाली,बड़े नवापारा में भक्तों का भीड़ बना हुआ था। श्रद्धालु नारायण प्रधान दर्राभांटा के अनुसार उसने अंचल के 6 प्रमुख प्राचीन शिव मंदिरों में जाकर शिव लिंग मे दूध,बेलपत्र पुष्प और जल अर्पित करके अपने आपको धन्य मानता हूं।
सावन के सोमवार बड़े महत्वपूर्ण होते हैं. इस दिन शिवलिंग को जल व बेलपत्र अर्पित करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. इस दिन विशेष तरह के प्रयोग भी किए जाते हैं. आज सावन का अंतिम सोमवार है और अंतिम सोमवार पर सोम प्रदोष का संयोग भी बन रहा है
अन्न वस्त्र दान से व्रत होता है सफल
प्रातः काल या प्रदोषकाल में स्नान करने के बाद शिव मंदिर जाएं. घर से नंगे पैर जायें तथा घर से ही लोटे में जल भरकर ले जाएं. मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल अर्पित करें, भगवान को साष्टांग करें. वहीं पर खड़े होकर शिव मंत्र का 108 बार जाप करें. दिन में केवल फलाहार करें. शाम भगवान के मंत्रों का फिर जाप करें और उनकी आरती उतारें. पूजा की समाप्ति पर केवल जलीय आहार ग्रहण करें. अगले दिन पहले अन्न वस्त्र का दान करें तब जाकर व्रत का पारायण करें.



